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thought
वासना जब तक प्रार्थना न बन जाए , तब तक स्त्री मे परमात्मा दिखाई नहीँ पड़ता. जहाँ अमृत मिल रहा हो वहाँ पानी की पुकार मचाने वाले को हम क्या कह सकते हैं- मूर्ख
कष्ट देने की चेष्टा चाहें वह स्वयं अपने आपको हो या किसी दूसरे को ये एक प्रकार की मानसिक रुग्णता है.
तुम जैसे हो अपने आप मे परिपूर्ण हो, तुम कभी किसी दूसरे जैसे नहीँ हो सकते क्यूँ कि संसार मे प्रत्येक प्राणी एक-दूसरे से भिन्न है, तुम मात्र किसी की नकल ही कर सकते हो और नकल कभी पूर्ण नहीँ हो सकती.
स्वयं को धोखा देने का कोई उपाय नहीँ है
क्रोध को जिसने पूरी विषाक्त दशा मे जान लिया , वह व्यक्ति जीवन् मे फिर कभी क्रोधित नहीँ हो सकता
जो व्यक्ति परम धार्मिक है वह न तो आस्तिक होता है और न ही नास्तिक अपितु वह वयक्ति ही पूर्ण मनुष्य होता है
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