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अमरबेल सी बाड़ रही दिल्ली की भीड़ वजूद के लिए लड़ रही दिल्ली की भीड़ तार, गटर, नाले, तहखाने से खोखली हुई ज़मीन उसी ज़मीन मे गड़ रही दिल्ली की भीड़ दोपहिया, तिपहिया, बसे, कारे मारे रोज मरने के लिए कम पड़ रही दिल्ली की भीड़ तलाश मे रोज़ी की हो रहे गाँव खाली गाँवो से पतझड़ सी झड़ रही दिल्ली की भीड़
अनिल वर्मा 20/9/95
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